तीनो लोको में भोले के जैसा दूसरा कोई दानी नहीं है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तीनो लोको में भोले के जैसा दूसरा कोई दानी नहीं है,

कौन सा भक्त है बात उसकी मेरे भोले ने मानी नहीं है,

बात सच्ची है करना न सनका देदी रावण को सोने की लंका,

भेद ग्रंथो में लिखा हुआ है कोई झूठी कहानी नहीं है,

फेरी देवो ने जब शिव की माला देके अमृत पिया विष का प्याला,

किसको भोले ने क्या क्या दिया है बात कोई छुपानी नहीं है,

पाप धोने को सारे जहां के शिव ने गंगा हमे देदी लाके,

शिव की करुणा भी इस में मिली है गंगा अमिरत है पानी नहीं है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।