धिनक धिन ता थैया तेरा प्यार नचाता है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

धिनक धिन ता थैया तेरा प्यार नचाता है,

जब कोई लाल तेरा तेरे भवन में आता है,

हाथो में लेकर इक तारा तेरी महिमा गाता है,

धिनक धिन ता थैया तेरा प्यार नचाता है,

सांसो में गीत वसाये तू सुर संगीत सजाये,

मीठी आवाज का जादू तेरे मन में प्यार जगाये ,

जो देखे तुझे जो तुझसे मिले तेरा हो जाता है,

धिनक धिन ता थैया तेरा प्यार नचाता है

तू पर्वत की है रानी है तेरी ममता है दीवानी,

तेरा मन है धरीज वाला तू सबकी सुने कहानी,

वो राजा हो जा रंक कोई तेरा सब से नाता है,

धिनक धिन ता थैया तेरा प्यार नचाता है

बिन बोले तू दुःख जाने बिन मांगे भर दे झोली,

तू मन की जाने भाषा समजे नैनो की बोली,

हम जो चाहे जो मांगे तुझसे मिल जाता है,

धिनक धिन ता थैया तेरा प्यार नचाता है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।