मन में तू है तन में तू

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मन में तू है तन में तू,

धरती में तू अम्बर में तू,

यहाँ भी देखु जिधर भी देखु हर तरफ है तू ही तू,

जग में आया तू अकेला नीम की छइया में तू,

खुद था भूखा पर न देखा सब मुश्किल देता है तू,

नजरो में है तू वसा सब के लव्बो पे साई तू ,

दिल की हर धड़कन में बाबा सांसो में है तू ही तू ,

मेरा साई साई रख रही मेरे दिल की धड़कने,

साई साई कहके सब लगी है धड़कने,

भगत तेरे सब खड़े दर्शन तो आकर दीजिये,

जो दुखी है दीं निर्बल उन पे किरपा कीजिये,

गगन आया दर पे तेरे उस पे रेहमत कीजिये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।