वो महाकाल है कालो का काल है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

अल्खनिरजन का डम डम डमरू भाजे,

हाथ रहे तिरशूल माथे पे चंदा साजे,

होके अडिग जो विरुद्ध सब का होके खड़ा है,

देवा दी देव महादेव जग में सब से बड़ा है,

वो महाकाल है कालो का काल है,

वो शिव शंकर तो सब से विशाल है.

पी के हला हल अटल है आज भी अजर अमर है,

तीन लोक आधीन है इसको किसका दर है,

आधी अनादि काल से सब कुछ रहा देख वो,

असुरियो के सीने तिरसूल से रहा भेद वो,

वो महाकाल है कालो का काल है,

वो शिव शंकर तो सब से विशाल है.

साधू सन्यासी योगी शिव मसान वासी,

हरिद्वार के बहार इन्ही के इनकी काशी,

जंतर मंत्र सब शिव के है सब तंत्र है शिव का,

दशो दिशाओं में जय कारा गूंजे शिव का,

वो महाकाल है कालो का काल है,

वो शिव शंकर तो सब से विशाल है.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।