जांड्डा वाला पुत्त वंद दा

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॥ पावन पाठ ॥

बल्ले बल्ले जांड्डा वाला पुत्त वंद दा

जोड़े लडडुआ दे देख लो चढ़ा के,

जांड्डा वाला पुत्त वंद दा

बल्ले बल्ले जी जंडॉ विचो रब दिसदा,

ताहियो सजदा मैं आन के किता,

जंडॉ विचो रब दिसदा,

बल्ले बल्ले जी जन्डा वाला खुश होँदा,

सते भेना दे दीदार जरा करके,

जन्डा वाला खुश होँदा,

बल्ले बल्ले जी आजो सारे मथा टेक लो,

जे कर सुतेया नसीबा नु जगाउना

बल्ले बल्ले रही नु ठिकाना लभेया,

संग कालिये दे चरनी लगाया राहि नु ठिकाना लभेया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।