भोले ख़याल राखिये मेरे इन फौजी भाइयाँ का

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले ख़याल राखिये मेरे इन फौजी भाइयाँ का,

लड़े जो मेरे देश की खातिर वीर सपाइयाँ का,

भोले ख़याल राखिये मेरे इन फौजी भाइयाँ का,

रात रात भर जाग जाग कर करे है पहरे धारी सी,

अपनी जान की ला के बाजी करे रक्षा माहरी से,

पीठ पे दुश्मन वार करे से फिर भी पड़ जाये भारी से

भोले साथ निभाइये फ़र्ज़ के सच्चे राहिया का,

भोले ख़याल राखिये मेरे इन फौजी भाइयाँ का,

छाती तान के खड़े रहे चले तूफानी रेट में,

अपने खून की नदी भा दे बॉर्डर के उस खेत में,

जन्मी माँ को नमन महारा जिहने जन्मे शेर ये देश के,

ना दर लागे भोले इन ने मौत की खाइयां का,

भोले ख़याल राखिये मेरे इन फौजी भाइयाँ का,

मेरे देश का मान बढ़ावे कड़े भी शीश झुकावे ना,

अंत सांस तक लगे लड़ाई कदे खाली आवे ना,

दुश्मन का सीना कर छली ये पीठ दिखावे न,

तिरंगा ऊचा राखिये हो फैन ये उची हवावियां का,

भोले ख़याल राखिये मेरे इन फौजी भाइयाँ का,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।