ऐसा क्या जादू कर डाला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ऐसा क्या जादू कर डाला मुरली जादूगरी ने

किस कारण से संग में मुरली राखी है गिरधारी ने

बांस के एक टुकड़े में देखा ऐसा क्या बनवारी ने

किस कारण से संग में मुरली राखी है गिरधारी ने

कभी हाथ में कभी कमर में कभी आधार में सजते हिअ

मोहन की साँसों की थिरकन से पल में यह बजती है

काहे इतना मान दिया है बंशी को गिरवर धारी ने

किस कारण से संग में मुरली राखी है गिरधारी ने

इक पल में मुरली दूर नहीं सांवरिया के हाथो से

रास नहीं रचता इसके बिन वो पूनम की रातों में

काहे को सौतन कह डाला इसको राधा रानी ने

किस कारण से संग में मुरली राखी है गिरधारी ने

अपने कुल से अलग हुई और अंग अंग कटवाया है

गर्म सलाखों से हाय मैंने रोम रोम बिंदवाया है

तब जाकर ये मान दिया बंशी को कृष्णा मुरारी ने

किस कारण से संग में मुरली राखी है गिरधारी ने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।