॥ पावन पाठ ॥
भोले बाबा शरण में तुम्हारी,
बैठी दर पे तेरे कब लोगे खबरियां हमारी,
भोले बाबा शरण में तुम्हारी
अपनी मस्ती में बैठे हो बाबा,
क्यों तुम सुनते नहीं भगतो से क्या रूठे हो बाबा,
भोले बाबा शरण में तुम्हारी,
भोले भाले हो जग से निराले,
टूटी कश्ती मेरी भोले कर दी है तेरे हवाले,
भोले बाबा शरण में तुम्हारी,
भोले वनवारी तेरा पुजारी,
भोले करदो दया तेरे दर का मैं हु भिखारी,
भोले बाबा शरण में तुम्हारी,