प्रिय राधे प्रिय राधे राधे राधे प्रिया प्रिया

श्री बलदेव कृष्ण सेहगल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दोहा : श्रीराधे वृषभानुजा, भक्तन प्राणाधार |

वृन्दा विपिन विहारिन्नी , प्रन्नावो बारम्बार ||

जैसो तैसो रावरो, कृष्ण-प्रिया सुखधाम |

चरण शरण निज दीजियो, सुन्दर सुखद ललाम ||

जय राधा माधव, जय गोपी जन, श्री वृन्दावन धाम |

जय कालिनिदी, कूल लता, जय सुभग कुञ्ज अभिराम ||

जयति नन्द कुल, कुमुद कलाधर, कोटि काम छवि धार |

जय कीरति कुल, नवल च्द्रिका रसिक किशोरी ललाम ||

जयति नवनागरी रूप गुण आगरी, सकल सुख सागरी, कुवरी राधा |

जाती हरी भामिनी, शाम अर्धांगिनी, हरी प्रिया श्री राधा ||

प्रिय राधे प्रिय राधे, राधे राधे प्रिया प्रिया |

प्रिय श्यामा, प्रिय श्यामा, श्यामा श्यामा प्रिया प्रिया ||

राधे राधे प्रिया प्रिया, श्यामा श्यामा प्रिया प्रिया |

सर्व सदग्रंथ का सार जानो इसे,

श्री कृष्ण का मोहिनी मंत्र मानो इसे |

जाप कर इसका पापी अधम तर गए,

सैंकड़ो अपना जीवन सफल कर गए ||

ध्यान श्यामा के चरणों का करते रहो,

स्वास प्रति स्वास मन्त्र यही जपते रहो |

जय राधे राधे प्रिया प्रिया |

जय श्यामा श्यामा प्रिया प्रिया ||

मन्त्र की साधना जो ना अपनावे,

फंस के विषयों में जाने किधर जावे |

मन्त्र जपने से भवसिंधु तर जावे,

सुख सहित संतो से संग पावे |

श्याम सुंदर भी मन्त्र जपते जपते रहे |

प्रेम में राधिका नाम कहने लगे ||

जय राधे राधे प्रिया प्रिया |

जय श्यामा श्यामा प्रिया प्रिया ||

रास लीला में एक दिन राधा ना थी,

श्याम ललिता से बोले उनको बुला लीजिये |

मुस्कुरा के ललिता यह कहने लगी,

उनको मुरली सुना के मन लीजिये |

हस के श्याम मुरलिया बजने लगे,

और मुरली की धुन में येही गाने लगे |

जय राधे राधे प्रिया प्रिया |

जय श्यामा श्यामा प्रिया प्रिया ||

तान बंसरी की सुन, श्री राधिका चल पड़ी |

रास मंडल में थी साड़ी सखिया खड़ी ||

यह निराली अदा श्याम सिखला रहे |

देवता पुष्प थे सब पे बरसा रहे ||

कौन आया कौन गया यह कुछ भी पता नहीं |

मिल के सब एक स्वर में कहने लगे ||

जय राधे राधे प्रिया प्रिया |

जय श्यामा श्यामा प्रिया प्रिया ||

श्री राधिका श्याम सुन्दर के संग हो खड़ी,

रास मंडल की छोभा बढाने लगी |

राधा मोहन की मनमोहनी छबि निरख,

गोपिया नाचने और गाने लगीं |

बज रहे डोलना, छेने, मृदंग,

सब के मुख से निकल रहे यही बोल थे |

जय राधे राधे प्रिया प्रिया |

जय श्यामा श्यामा प्रिया प्रिया ||

श्याम उद्धव से एक दिन कहने लगे,

मधुपुरी का यह वैभव सुहाता नहीं |

क्या बताऊँ तुम्हे मेरे प्यारे सखा,

प्रेम ब्रज वासिओ का मैं भुला पाता नहीं |

इतना कहते ही सरकार आसूं बहाने लगे,

श्याम हो के विकल्प एही कहने लगे ||

जय राधे राधे प्रिया प्रिया |

जय श्यामा श्यामा प्रिया प्रिया ||

रुकमनी से कहा एक दिन श्याम ने,

द्वारिका में भी मनमौज मैं पाता नहीं |

जिन्हों ने निछावर मुझ पर सर्वस किया,

उनके ऋण से उऋण हो पाता नहीं |

आ गयी याद ब्रिग्दिन्हू बहाने लगे,

प्रेम में मस्त हो श्याम यह कहने लगे ||

जय राधे राधे प्रिया प्रिया |

जय श्यामा श्यामा प्रिया प्रिया ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।