पर्वत पे आजा मेरी गौरा क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत पे आजा मेरी गौरा क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी

मैं कैसे आऊं मेरे भोले मेरे से प्यारी तुम्हें गंगा हैं

तू तो पगली है मेरी गौरा गंगा तो जटाओं की शोभा है

पर्वत पे आजा.....

मैं कैसे आऊं मेरे भोले मेरे से प्यारा तुम्हें चंदा है

तू तो पगली है मेरी गौरा मस्तक की शोभा चंदा है

पर्वत पे आजा.......

मैं कैसे आऊं मेरे भोले मेरे से प्यारे तुम्हें सर्पा हैं

तू तो पगली है मेरी गौरा गले की शोभा सर्पा हैं

पर्वत पे आजा......

मैं कैसे आऊं मेरे भोले मेरे से प्यारा डमरू है

तू तो पगली है मेरी गौरा डमरू हाथों की शोभा है

पर्वत पे आजा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।