सुन बाग दे अंदर वडके बाबे दा डमरू बोल रेहा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सुन बाग दे अंदर वडके बाबे दा डमरू बोल रेहा

तू डम दी ताल च तड़फे बाबे दा डमरू बोल रेहा

टोये दे पिछ्ले पासे वरगा उसदा रंग अनोखा

इंज जापदा नाल तेरे आज गौरा हो गया धोखा

असी आई खुब झगड़के बाबे दा डमरू बोल रेहा

सुन........

जादुगर दे नाल है आया भूतनिया दा टोला

आक दा तूरा रग्दी जावण खान भांग दा गोला

ऐथे हर दम खुंडा खड़के बाबे दा डमरू बोल रेहा

सुन........

तू चम्बे दी कली नी गौरा ओ ते भुत लड़ाका

उस लंगोटी वाले दे घर कटना पैना तैनू फाका

असी कोयला होइया सड़के बाबे दा डमरू बोल रेहा

सुन..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।