नज़रे कर्म कीजिये मेहर कर दिज्ये

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॥ पावन पाठ ॥

नज़रे कर्म कीजिये मेहर कर दिज्ये,

सुने सुने जीवन में रंग भर दीजिये,

तुझबीण कौन हमारा साई देदो सहारा,

संगी साथी अपने पराये सब से हमने धोखे खाये,

और राह कुछ है नजर न आये दूर करो मुश्किल के साये,

तुझबीण कौन हमारा साई देदो सहारा,

पल में मुकदर साई बदल दे जग मग दीप पानी से चलते,

कड़वी नीम मीठी कर दिनी अन्थो को ज्योति दे दीनि,

तुझबीण कौन हमारा साई देदो सहारा,

हिन्दू मुश्किल सिख ईसाई सब को इक समझते साई,

सब का मालिक एक है कहते खुशियों से झोली भर देते,

तुझबीण कौन हमारा साई देदो सहारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।