कावड़ियाँ छम छम नाचेगा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तेरा डम डम डमरू भाजे गा कावड़ियाँ छम छम नाचेगा,

कावड़ियाँ रुन जून नाचेगा,

कावड़ भोले तेरी धरि है कंधे पे,

भोला हरी हरी बम बम गावेगा,

कावड़ियाँ छम छम नाचेगा,

सावन का यु फर्स्ट महीना भोला कैसी धूम मचावे गा,

कावड़ियाँ छम छम नाचेगा,

भांग धतूरा दूध चढ़े है,

और चिलम में सुट्टा लगावे गा,

कावड़ियाँ छम छम नाचेगा,

हरिद्वार भूमि अति पावन,

नागर गंगा खूब न्हावे गा,

कावड़ियाँ छम छम नाचेगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।