तेरी भांग न रगड़ी जांदी हो ओ भोले भंडारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तेरी भांग न रगड़ी जांदी हो ओ भोले भंडारी,

टूटी खुंडी टुटेया सोटा,

भांग न रगड़ी जांदी हो ओ भोले भंडारी,

रहने में तेरा महल नहीं से,

तेरा स्मशाना में डेरा ओ भोले भंडारी,

तेरी भांग न रगड़ी जांदी हो ओ भोले भंडारी,

खाने में तेरा लाज नहीं से,

तू करे से पेट पुजारी रे ओ भोले भंडारी,

तेरी भांग न रगड़ी जांदी हो ओ भोले भंडारी,

इक दिन रगड़ू दो दिन रगड़ू,

क्या रोज की बीमारी हो ओ भोले भंडारी,

तेरी भांग न रगड़ी जांदी हो ओ भोले भंडारी,

रगड़ रगड़ के मैं तंग आई,

मैं तो हिमाचल में जाऊगी ओ भोले भंडारी,

तेरी भांग न रगड़ी जांदी हो ओ भोले भंडारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।