जय जय भोला भंडारी जय जय भोला भंडारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय जय भोला भंडारी जय जय भोला भंडारी,

भंग पी के मस्ती में नाचे भोला भंडारी,

पार न पाया कोई इनका सुध की लेना है न्यारी,

जय जय भोला भंडारी,

अमर अजय तू आधी अनादि व्यापराह कण कण में,

जन्म है तुझसे तू ही परले है श्रिस्ति के आँगन में,

कभी तू योगी कभी तू जोगी,

कभी तू है संसारी,

पार न पाया कोई इनका शिव की लीला है न्यारी,

जय जय भोला भंडारी,

देवो के हिट विष पी डाला नील कंठ कहलाये,

भागी रथ के कुल को तारा धरा पे गंगा लाये

काशी नाथ तुम विश्व नाथ तुम अमरनाथ तू केदार नाथ तू,

महादेव विषधारी पार न पाया कोई इनका शिव की लीला है न्यारी,

जय जय भोला भंडारी,

मंत्र रटे जो नमये शिवाये किरपा तुम हो करते,

बाल न बांका उनका होता जो तेरा नाम सुमिर ते,

पल भर में तू बिगड़ी बनाते दुःख मिटाते पार लगाते,

तुम भोला त्रिपुरारी पार न पाया कोई इनका शिव की लीला है न्यारी,

जय जय भोला भंडारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।