मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पीले पीले यह रास मीठा है राम का,

जो रस पीने से जुबा पे नाम हो घनश्याम का ।

तू पी तेरी दुनिया लुटा के पी, मस्ती में आके पी,

इस से जयादा शौंक है तो गुरु के शरण में जा के पी ।

तेरा जब निकल जायेगा जी तो फिर कौन कहेगा पी ॥

मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई,

जहाँ मेरे अपने सिवा कुछ नहीं है l

पता जब लगा मेरी हस्ती का मुझको,

सिवा मेरे अपने कहीं कुछ नही है ।

मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...

सभी में सभी में फकत मैं ही मैं हूँ,

सिवा मेरे अपने कहीं कुछ नही है ।

मुझे मेरी मस्ती कहँ ले के आई...

ना दुःख है ना सुख है ना शोक है कुछ भी,

अजब है यह मस्ती पीया कुछ नहीं है

मुझे मेरी मस्ती कहँ ले के आई...

अरे मैं हूँ आनंद आनंद मेरा

मस्ती ही मस्ती और कुछ नहीं है

मुझे मेरी मस्ती कहँ ले के आई...

भ्रम है द्वन्द है जो तुमको हुआ है

हटाया जो उसको खदफा कुछ नहीं है

मुझे मेरी मस्ती कहँ ले के आई...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।