मैं भोले का कलंधर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोला मेरा तू ही पीर मेरा पैगंबर,

भंडारी त्रिपुरारी दया का तू समंदर,

भोला है मेरे अंदर मैं भोले का कलंधर,

चढ़ी शिव के नाम के मुझको खुमारी,

मैं तुझपे ही रमा हु शिव त्रिपुरारी,

मैं था भिखारी तूने बनाया सिकंदर त्रिपुरारी भंडारी दया का तू है समन्दर,

भोला है मेरे अंदर मैं भोले का कलंधर,

भस्म तेरी भोले तन पे लगा के,

शिव की जटा से निकली गंगा में नहा के,

झूम रहा मैं देखे है धरती ये अम्बर,त्रिपुरारी भंडारी दया का तू है समन्दर,

भोला है मेरे अंदर मैं भोले का कलंधर,

मन में बनाया शिव तेरा शिवाला,

तेरी भगति की मन जगती है मया,

मस्त मलंगी तेरा धुना मैं करता आडम्बर त्रिपुरारी भंडारी दया का तू है समन्दर,

भोला है मेरे अंदर मैं भोले का कलंधर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।