जै भोले बाबा कैलाशों राजा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय भोले बाबा कैलाशो के राजा

डमरू बाजा के नाचे जा

दूनिया है जलिम जेने न देति

अघोरी अघोरी है खेती

अशको की बूंधो मैं

तसवीर जंजीरो की

गैरीबो के जाखमो पे

लेकिरो की ख़ामोशी

सहिदो के घर मैं

बूढी माँ हो रोटी क्यो

सहमी हर और लाडकी

डार में होति कियो

जागा जनता है

फेर कैसी ये बेहोशी क्यो

पइसा कामना है और

गिरवी है मन की चीज

यारा मेन तेरा भोले

मुजको लॉग दोशी बोले

काश ये जहाँइले मेरे

सर चढ ते होल होल

काल बडले बडले

बिल्ला ना महाकाल

विपदा को थाल थाल

खुद भोले कोई जाल

सब हो गइ पगले पगले

कोइ पुछे ना हाल

ये दुइया को फेर से रींगल

कर डोले कर डोले

शिव कैलाशो के वाशी

गोरी धरो के राजा

राजा राजा तू महाराजा

राजा राजा तू महाराजा

भोले बाबा मुख्य तेरी कर्ता हू

कर्ता हू दिल से भक्ति

हमसे भक्ति को पैलो तुम

भोले बाबा इटनी भी सस्ति

जय भोले बाबा कैलाशो के राजा

डमरू बाजा के नाचे जा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।