झुलो डालो कदम्ब की डार आई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

झुलो डालो कदम्ब की डार आई सावन की झुला बहार

राणा सग श्री शयाम झुले झुलन चाली सब बज की नारी

हिलमिल झुले राजा मोहन पठ रेशम की है डोरन

हौले हौले पेग बढावे राघा देखौ दिल घमकाने

झोटा देवे बिरज की नारी

झुलो डालयो बज की नार

घनघोर घटा है छाई सावरिया की रितु है आई

घननननन बादल गरजे मेघा देखो खुब बरसे

भिझ गई सब बज की नारी,

झुलो डालयो बज की नार

दादुर मोर कोरिया काली शशीशशी देखे लीला नयारी

रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे कुकुर कोयल बोले

नाचे मोर पैदा आज

झुलो डालयो बज की नार

Shashikala parwal

Hyderabad

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।