हे रे भोले तेरे मेले में छम छम नाचे कावड़ियाँ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे रे भोले तेरे मेले में छम छम नाचे कावड़ियाँ,

तेरी भगति में हुये दीवाने बालक बूढ़े छेल सुहाने,

ही रे रे भगतो की इस रेले में छम छम नाचे कावड़ियाँ,

तेरे प्यार में रंग गई नगरी जग मग जग मग ज्योति जग रही,

ही रे धाम तेरे अलबेले मे छम छम नाचे कावड़ियाँ,

दूर दूर से जनता आवे देख देख के मन हर्शावे,

हे रे गाडी मोटर ठेले में छम छम नाचे कावड़ियाँ,

सतन खटाना भजन बनावे केशव और शिवानी गावे,

हे रे कान हारो इस खेले में छम छम नाचे कावड़ियाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।