नसेड़ी बनाना छोड़ दो ओह भोले वरदानी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भंगियाँ जरा पीस दो ओ गोरा रानी,

नसेड़ी बनाना छोड़ दो ओह भोले वरदानी

आज बड़ी मुश्किल से लाया हु ढूंढ के,

पूरा कैलाश आज आया हु घूम के,

मान जाओ गोरा करो न मन मानी,

नसेड़ी बनाना छोड़ दो ओह भोले वरदानी

नई नई बहु आई है अपने घर में इज्जत रहे गी क्या उसकी नजर में,

पीस दो भंगियाँ बनाओ न कहानी,

नसेड़ी बनाना छोड़ दो ओह भोले वरदानी

मायके तो भेज उसे रिद्धि के साथ में,

पीसो न भंगिया गोरा बैठो मेरे पास में,

खाये गी का सुन मेरी बहु रानी,

भंगियाँ जरा पीस दो ओ गोरा रानी,

तुम सा गणजेडी न देखा भंगेड़ी

पाया है मैंने ये कैसा नसेड़ी,

रखो सिलवाता तुम लेके आओ पानी,

नसेड़ी बनाना छोड़ दो ओह भोले वरदानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।