भोले क्या अद्द्भुत नज़ारा तेरे कैलाशो पे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

भोले क्या अद्द्भुत नज़ारा तेरे कैलाशो पे है ।

देव देखन आ गए सब तेरे कैलाशो पे है ॥

संग पार्वती विराजे है,

गोदी गणपति साजे है ,

बैठे है शिव अविनाशी देव देखन आ गए -२

भोले क्या अद्द्भुत नज़ारा तेरे कैलाशो पे है ॥

जटा में गंगा साजे है,

मस्तक चंदा सोहे है,

गले में नागो की है माला देव देखन आ गए -२

भोले क्या अद्द्भुत नज़ारा तेरे कैलाशो पे है ॥

यक्ष रक्ष भैरव है डोलत,

नंदी भृंगी नृत्य करत,

बोले वनवासी जहाँ पे देव देखन आ गए -२

भोले क्या अद्द्भुत नज़ारा तेरे कैलाशो पे है ॥

कोयल शब्द सुनावत सुन्दर,

भ्रमर करत है गूंजा सी,

कामधेनु करत दुग्ध वर्षा देव देखन आ गए -२

भोले क्या अद्द्भुत नज़ारा तेरे कैलाशो पे है।

देव देखन आ गए सब तेरे कैलाशो पे है ॥

‘कंचन ढोलक भजन’

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।