छोड़ के तेरा धाम ओ बाबा श्याम मैं नहीं जाना रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छोड़ के तेरा धाम, ओ बाबा श्याम में नहीं जाना रे

नहीं जाना मै,नहीं जाना मैं,नहीं जाना मैं,नहीं जाना ,

नहीं जाना मैं,नहीं जाना मैं,नहीं जाना मैं,नहीं जाना ,

छोड़ के तेरा धाम, ओ बाबा श्याम मैं नहीं जाना रे

नहीं जाना मैं,नहीं जाना में,नहीं जाना में,नहीं जाना ,

नहीं जाना में,नहीं जाना में,नहीं जाना में,नहीं जाना ,

छोड़ के तेरा धाम, ओ बाबा श्याम में नहीं जाना रे

जो सोचू मै जाने की तो, दिल मेरा तड़पता है,

आंखियां मेरी नीर बहाएं, मन का पंछी ये कहता है,

छोड़ के तेरा धाम, ओ बाबा श्याम में नहीं जाना रे,

जब पुछु निशान तो , कइयों निशान दिखते है ,

लहरा कर बलखाकर ,मस्ती मै ये कहते है,

छोड़ के तेरा धाम, ओ बाबा श्याम में नहीं जाना रे ,

दर्शन करने जाऊँ जब भी ,भगतो का रैला दीखता है,

उनके जयकारे और भजन , बाबा को रिझाकर कहते है,

छोड़ के तेरा धाम, ओ बाबा श्याम में नहीं जाना रे,

जब बटता है चूरमा ,खाटू का कण कण कहता है,

हवा यहाँ पर सर सर बहकर , मिटटी उड़ उड़ कहती है,

छोड़ के तेरा धाम, ओ बाबा श्याम में नहीं जाना रे ,

जो देखूं बाबा का चेहरा , श्याम नशा छा जाता है,

रोम रोम थिरक थिरक कर, मस्ती मै ये कहता है,

छोड़ के तेरा धाम, ओ बाबा श्याम में नहीं जाना रे,

हौले हौले चॅवर धुराऊँ तो , मन मै ख्याल आ जाये ,

छोड़ के बाबुल का घर ,प्या के घर नहीं जाना रे,

छोड़ के तेरा धाम, ओ बाबा श्याम में नहीं जाना रे,

जो देखूं अँखियाँ उसकी, पाँव नहीं उठते मेरे,

साँसे कुछ थम सी जाती है, दिल भी कुछ कुछ कहता है,

छोड़ के तेरा धाम, ओ बाबा श्याम में नहीं जाना रे ,

जो लोटू खाटू से घर, मेरा बाबा रोता है ,

अँखियाँ उसकी कल कल रोये ,हाथ पकड़ ये कहता है,

छोड़ के मेरा धाम, ओ पूजा उपाध्याय आज नहीं जाना रे,

सिंगर : पूजा उपाध्याय

राइटर & कंपोजर : पूजा उपाध्याय

मो: 9315494162

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।