मोरें अंगना गजानन आए री

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

मोरे अंगना गजानन आए री,

आप भी आए संग रिद्धि सिद्धि लाए,

सोए भाग जगाए री,

मोरे अंगना गजानन आए री,

विघ्न हरण मंगल सुखकारी,

कर आए मुसे की सवारी,

दवार हमारे बडे परेम से,

सुंड हिलाते आए री ,

मोरे अंगना गजानन आए री,

दीप जले हैं दवारण दवारे,

शुभ हरियाली वंदन वारे,

चंदन चौक पीडिया बैठे,

लडुवा गट गट खाए री,

मोरे अंगना गजानन आए री,

जिस घर मे गनराज पधारे,

उस के हो गए वारे न्यारे,

आज मोरे घर आके परभु जी,

सोए भाग जगाए री,

मोरे अंगना गजानन आए री,

दस दिन रह के जब जाओगे,

सवामी याद बहुत आओगे,

ये शहनाज गजानन तेरी,

महिमा हमेंशा गाए री,

मोरे अंगना गजानन आए री,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।