लाख लाख वंदन तमने

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

Refrain:

ए लाख लाख वंदन तमने, कोटि कोटि वंदन

गुरु गम का सागर तमने, लाख लाख वंदन

Verses:

हाँ, अज्ञान जिवोडो गुरु जी, शरण में आयो,

ए (हाँ री) ज्ञान को दीपक गुरु जी...

जनाए हो दीजो

गुरु गम...

हाँ, लाख हो चौरासी में जिवोडो, भटकी में आयो

ए (म्हारी) अब की चौरासी गुरु जी...

छुड़ाई हो दीजो

गुरु गम...

हाँ डूबत, आ डूबत हो गुरूजी, आप ने बचायो

ए अब को जीवन हो गुरू जी...

संवार हो दीजो

गुरु गम...

हाँ, इन हो सेवक की गुरूजी, अरज गुसाई,

ए आवागमन को बंधन...

छुड़ाई हो दीजो

गुरु गम...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।