नैना खुले तो तेरा दर्शन हो

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

नैना खुले तो तेरा दर्शन हो,

होठ हिले तो तेरा कीर्तन हो,

याद रखु तेरे नाम को गुरूजी,

मन भटके तो तेरा सुमिरन हो

सांसो में है वास तुम्हरा हर पल है एहसास तुम्हारा,

मन के अंदर मन के बाहर आप मेरे संग हर्षण हो,

नैना खुले तो तेरा दर्शन हो............

सत्ये असतये का भेद बताया ज्ञान का ऐसा दीप जलाया,

जो पथ दिखला या है मुझको उसपर चलने को प्रण हो,

नैना खुले तो तेरा दर्शन हो...........

हर पल इक नाइ आशा जगा दे,

जीवन की हर वाधा मिटा दे,

देना आशीर्वाद यही अब चरणों में तेरे जीवन हो,

नैना खुले तो तेरा दर्शन हो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।