मैंने मेहँदी लगाई रे शिव नाम की

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैंने मेहँदी लगाई रे शिव नाम की,

मेरी चूडियो में शिव मेरी चुनरी में शिव,

मैंने नथुनी गड़ाई रे शिव नाम की,

मेरे नैनो में शिव भोले भंडारी,

मेरे प्राणो में नंदी बेल की सवारी,

मेरे होठो पे शिव मेरे हिरदये में शिव,

मैंने ज्योति जलाई रे शिव नाम की,

मैंने मेहँदी लगाई रे शिव नाम की,

अब छाया है शिव अंग अंग मेरे,

मेरा तन मन रंगा है शिव रंग तेरे,

मेरे प्रीतम है शिव मेरा जीवन है शिव,

मैंने माला बनाई रे शिव नाम की,

मैंने मेहँदी लगाई रे शिव नाम की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।