जो भी दरबार गया लौटा नहीं खाली है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे भोले की महिमा जग से निराली है,

जो भी दरबार गया लौटा नहीं खाली है,

हम है बगिया के फूल उस के वही माली है,

जो भी दरबार गया लौटा नहीं खाली है,

दिल से जो याद करे किस्मत स्वर जाती है,

दुभ ती नइयाँ नदियां पार उतर जाती है,

आती है बहार यहाँ उस ने नजर डाली है,

जो भी दरबार गया लौटा नहीं खाली है,

सारे रस्ते जब बंद हो तो शिव का ध्यान करो,

सपने सच होंगे तेरे मन से गुण गान करो,

फुंना आलम भी दर पे आया बन सवाली है,

जो भी दरबार गया लौटा नहीं खाली है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।