पत्थर दी मूर्ति दा फुला वाला दिल ए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मुहो मंगी जिसतो मुराद जन्दी मिल,

पत्थर दी मूर्ति दा फुला वाला दिल ए,

जीहदे बूहे घूम लाये भुटे जांदे खिल ऐ,

पत्थर दी मूर्ति दा फुला वाला दिल ए,

खोल के खजाने जदो दाती माये बह जांदी,

हर चीज ले ले साड़ी झोली छोटी पै जन्दी,

रेहमता करोडा दा न दिंडी कोई बिल ऐ,

पत्थर दी मूर्ति दा फुला वाला दिल ए,

साडीया मुशीबत दा एहदे कोलो हल है,

रंका नु बनाउँदी राजा लौंडी न इक पल है,

टूटे होया दिल एहदे बूहे जंदा सील एह

पत्थर दी मूर्ति दा फुला वाला दिल ए,

श्रद्धा दे नाल जदो सिर साडा झुक्दा जिंदगी दा निर्दोश,

रथ नहियो रुकदा गोटे वली चुनी ेहड़ी करदी चील मिल एह

पत्थर दी मूर्ति दा फुला वाला दिल ए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।