अवढरदानी भोले शंकर आ कर पड़ा हु

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हाथ सिर बढ़ कर तुम आज रखो,

अवढरदानी भोले शंकर आ कर पड़ा हु तेरे दर पर आकर मेरी लाज रखो,

भक्तो का तुम ने भाग्ये स्वारा,

देदी मुकति भव से तारा,

मेरे सिर पे भक्ति का ताज रखो,

अवढरदानी भोले शंकर आ कर पड़ा हु तेरे दर पर आकर मेरी लाज रखो,

करता हु भोले पूजा तेरी पूरी करदो ईशा मेरी,

मेरे जिमे सेवा का काज रखो,

अवढरदानी भोले शंकर आ कर पड़ा हु तेरे दर पर आकर मेरी लाज रखो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।