भांग रगड़ के पिलाऊ भोला मुड़ बना ले ने

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

भांग रगड़ के पिलाऊ भोला मुड़ बना ले ने,

चल हरिद्वार चालागे नंदी तेरा सजा ले ने,

भर भर लौटे पिलादे गोरा आज न नाचू गा,

कावड़िया के मेले में मैं जम के नाचू गा,

सब कुछ छोड़ के चालु गोदी गणपति में उठाऊ,

हरिकी पौड़ी पे मैं घोटे गंगा में लाउ,

फिर हाथ पकड़ के भोले संग तू मने नचा ले ने,

हरिद्वार चालागे नंदी तेरा सजा ले ने,

जल्दी हो ले त्यार गोरा लावे न देरी,

मैं बम बम करके बोले देख बात भगत मेरी,

जो आस लगा के आ रहे उनके संकट काटू गा,

रे कावड़िया के मेले में मैं जम के नाचू गा,

काला चहल भी भोले तेरी भक्ति में खो रहा,

काम मिर्चपुर वाला तेरी मस्ती हो रहा,

कृष्ण ने कह के तेरे भजन गवा ले ने,

चल हरिद्वार चालागे नंदी तेरा सजा ले ने,

ना घने की आँख देखु भगत निराला से,

जी चावे जब सुने गाल गिला घरता डाला से,

इन भगतो के रहु साथ कदे न न्यारा बांटू गा,

रे कावड़िया के मेले में मैं जम के नाचू गा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।