हो किस्मत वाले बच्चो तुम माँ से दूर न हो जाना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हो किस्मत वाले बच्चो तुम माँ से दूर न हो जाना

गयी अकेला मुझे छोड़ ना कब मैंने ये पहचाना

खुद रोटी रहती थी मुझको हंसाया करती थी

कृष्णा कन्हैया लल्ला कहते बाहों में झुलाया करती थी

नटखट था बचपन में जाएं कितनी शरारत करता था

पापाजी का गुस्सा मेरी माँ को सहना पड़ता था

भोला और नादाँ बताके मुझको बचाया करती थी

नेहला धुला कर स्कूल वो अपने साथ में लेकर जाती थी

नज़र लगे न मुझको मेरे कला टीका लगाती थी

कुछ बन जाऊं पढ़ लिखके सपने सजाया करती थी

अब उसकी यादें ही रह गयी प्रेम को आज तरसता हूँ

औरों की माओं में अपनी माँ को देखा करता हूँ

कौन सुलाए लेहरी मुझको जैसे वो सुलाया करती थी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।