ढोल नगाड़े भजते है बाबा तेरे मंदिर में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ढोल नगाड़े भजते है बाबा तेरे मंदिर में,

नित नये मेले लगते है भूत नाथ के मंदिर में हो,

दरबार तू अपने भुला,

ढोल नगाड़े भजते है बाबा तेरे मंदिर में,

सारे जहां से है न्यारा दरबार तेरा है प्यारा,

देख के प्यारी छवि तुम्हारी झूमे मनवा हमारा,

बोलो जय बाबा की,

भीड़ बड़ी होती है बाबा तेरे मंदिर में,

नित नाये मेले सजते है भूत नाथ के मंदिर में,

दरबार तू अपने भुला,

कितनो को हम ने देखा है जो रोते हुए जाते है,

पर तेरे दरबार से बाबा हस्ते हुए आते है,

खाली झोली भर्ती है बाबा तेरे मंदिर में,

नित नाये मेले सजते है भूत नाथ के मंदिर में,

दरबार तू अपने भुला,

हम है दीवाने तेरे बाबा तेरा ही दर्शन चाहे,

दिल से लगा ले मन में वसा ले हम तो इतना चाहे,

मंशा पुरण होती है बाबा तेरे मंदिर में,

नित नाये मेले सजते है भूत नाथ के मंदिर में,

दरबार तू अपने भुला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।