भोले का लग रहा से मेला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले का लग रहा से मेला,

ये धाम बड़ा से अलबेला,

चल गोरी कावड़ लावे गे शिव गोरा को साथ मनावे गे,

भोले की ज्योत जगावे गे बाबा के दर्शन पावे गे,

थोड़ी जल्दी उठा ले तू थैले यो धाम बड़ा से अलबेला,

भोले का लग रहा से मेला,

ये धाम बड़ा से अलबेला,

हम मल मल गंगा न्हावे गे काया को शुद्धि बनावे गे,

गऊ मुख पे शीश झुकावे गे हम शिव के दर्शन पावे गे,

यहाँ लग रहा भगतो का रेला यो धाम बड़ा से अलबेला,

भोले का लग रहा से मेला,

ये धाम बड़ा से अलबेला,

शिवलिंग पे दूध चादावे गे और मन वंचित फल पावेंगे.

भोले ने दुखड़ा सुनावे गे हम नील कंठ पे जावे गे,

भर भर के आवे से थेला यो धाम बड़ा से अलबेला,

भोले का लग रहा से मेला,

ये धाम बड़ा से अलबेला,

वह सचिन खटाना आवे गे मनसा चंडी के भी जावे गे,

भोले के भजन बनावे गे हम मिल जल के सब गावे गे,

केशव गावे शिवानी की गेला यो धाम बड़ा से अलबेला,

भोले का लग रहा से मेला,

ये धाम बड़ा से अलबेला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।