आयो हरिद्वार को स्टेशन

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आयो हरिद्वार को स्टेशन भरी कावड़ियों से रेल,

कावड़िया बने खिलाड़ी भोले संग लायो मेल,

कोई हरी की पौड़ी न्हावे कोई न्हावे गंगा घाट,

कोई यादव कोई गुजर कोई हरयाणे को जाट,

हाथो में चिलम उठाई और भंग भी पी लई गेल,

कावड़िया बने खिलाड़ी भोले संग लायो मेल,

कोई बम बम भोले बोले कोई बोले हर हर गंगा,

कोई शिवलिंग दूध चढ़ावे कोई पूजे नाग भुजंगा,

हे लगाया कावड़ियों का मेला कैसी हो रही रेलम पेल,

कावड़िया बने खिलाड़ी भोले संग लायो मेल,

हे कही डम डम डमरू भाजे कही भजन भजे भोले के,

हे आजाद मण्डोरी कैसे शबद सजे भोले के,

संदेया के सुमे गावे रहो भोले सब की जेल,

कावड़िया बने खिलाड़ी भोले संग लायो मेल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।