मैं जाऊ मेला में हरिद्वार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं जाऊ मेला में हरिद्वार नाथ तू भंग गोटन की ना कहा,

माहरे जोगी वाले ठाठ करेगी क्या मेला में जा के,

सब सखी सहेली जावे और हस हस के बतलावे,

बात मेरी मान मेरे भरतार नाथ तू भंग गोटन की ना कहा

मैं जाऊ मेला में हरिद्वार...

मेला में रैलम पेला मेरी गोरा लगे धकेला,

खड़ी फिर देखे मेरी बात करेगी क्या मेला में जाके,

माहरे जोगी वाले ठाठ करेगी क्या मेला में जा के,

जो न मानो बात हमारी ना भंगियाँ घुटे तुम्हारी,

तू घोटी भोले अपने हाथ नाथ तू भांग घोटन की आखे,

मैं जाऊ मेला में हरिद्वार...

करे नंदी की असवारी चलु मेला चाले प्यारी,

तू गणपत ने लेले साथ खावे चाट पकोड़ी जाके,

माहरे जोगी वाले ठाठ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।