जीवन है बेकार भजन कर दुनिया में

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॥ पावन पाठ ॥

दोहा : कौन होता है कब किसी का, दम निकल जाने के बाद

खाक रह जाती है बाकि जिस्म जल जाने के बाद

अरे मूरख तू अपने ही मद में बैठा चूर है

इसीलिए तो प्रभु भी तुमसे कोसों दूर है

जीवन है बेकार भजन कर दुनिया में

झूठा है यह संसार भजन कर दुनिया में

बड़े भाग्य से नर तन पाया,

इसमें भी हरी गुण नहीं गाया ।

किया ना प्रभु से प्यार, भजन बिन दुनिया में,

जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में ॥

माया ने तुझको बहकाया,

संग चले ना यह तेरी काया ।

क्यों बनता है होशियार, भजन बिन दुनिया में,

जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में ॥

धन दौलत और महल खजाने,

जिनको मूरख अपना जाने ।

जायेगा हाथ पसार, भजन बिन दुनिया में,

जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में ॥

क्या लेकर तू आया जगत में,

क्या लेकर तू जायेगा संग में ।

रे मत मंद गवार, भजन बिन दुनिया में,

जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में ॥

यम के दूत तुझे लेने को आए,

रो रो डरके तू चिल्लाए ।

तोहे पड़े करारी मार, भजन बिन दुनिया में,

जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में ॥

अपने गुरु की शरण में जाओ,

जीवन अपना सफल बनाओ ।

तब होगा उद्धार, भजन बिन दुनिया में,

जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।