चाहे नचाले जितना अपने दरबार में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चाहे नचाले जितना अपने दरबार में मुझको नचाना न तू जूठे संसार में,

सारी दुनियां घूम के बाबा आया शरण तिहारी,

सौंप दी डोरी अब तो तुम को शिव शंकर त्रिपुरारी,

कट जाये सारा जीवन तेरे ही प्यार में,

मुझको नचाना न तू जूठे संसार में,

जिसने तुम पर किया भरोसा फल उसने ही पाया,

अजब निराली लीला तेरी कोई समज न पाया,

आने लगा है आनंद तेरी जय जय कार में,

मुझको नचाना न तू जूठे संसार में,

तेरा ही बाबा के पुजारी अब तो मुझको जीना,

तू ही मेरा भाग्यविद्याता छूटे दरबार कभी न,

तेरे होते न डुभे नाइयाँ मजधार में,

मुझको नचाना न तू जूठे संसार में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।