मके में ही जल चड़ाउ गा अब की सावन के पावन महीने में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दुनिया जाने शिवलिंग छुपाये बैठे हो मक्का मदीने में,

मके में ही जल चड़ाउ गा अब की सावन के पावन महीने में,

भोले बाबा भोले है पर तांडव जब रचाये गे,

मक्के में रहने वाले हर हर बम बम गायंगे,

चमके गी अब तो तलवारे आग लगी है सीने में,

मके में ही जल चड़ाउ गा अब की सावन के पावन महीने में,

भोले के दीवाने है हम भोले भी है भाले भी,

इतहास पढ़ लो हम इतहास बदलने वाले भी,

रोक ने का दम नहीं है किसी भी कटे पिटे कमीने में,

मके में ही जल चड़ाउ गा अब की सावन के पावन महीने में,

शम्भू नाथ कहते है अनाथो के जो नाथ है वही हमारे शिव शम्भू,

संदीप अचराये के साथ है,

भूलू खपर पिस्तौल फायर करे कमीनो पे,

मके में ही जल चड़ाउ गा अब की सावन के पावन महीने में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।