गौरा रानी ने जपी ऐसी माला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गौरा रानी ने जपी ऐसी माला मिला है देखो डमरू वाला,

मिला है जोगी मतवाला गौरा रानी ने जपी ऐसी माला,

गोरा से भोले शम्भू काहे पुकारा,

गोरा जी बोली चाहु साथ तुम्हरा,

तुम जैसा नाथ नहीं कोई निराला,

गौरा रानी ने जपी ऐसी माला

महलो की रानी तू है मैं हु इक जोगी,

मेरे संग गोरा तुम कैसे रहो गी,

श्मशान पर्वत पे मैं रहने वाला,

गौरा रानी ने जपी ऐसी माला

यहाँ रहो गे भोले मैं भी रहु गी,

दासी तुम्हारी बन के सेवा करुँगी,

गोरा ने शिव जी को डाली वर माला,

गौरा रानी ने जपी ऐसी माला

गोरा के हिर्दय में शिव जी वसे है,

जन्मो के बंधन में दोनों बंधे है,

वैरागी दोने ने जग को सम्बाला,

गौरा रानी ने जपी ऐसी माला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।