कन्हैया तो प्रेम का भूखा है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सच कहता हु मैं कसम से,

सोने चांदी न धन से करलो सेवा तन मन से,

मिलते है श्याम भजन से,

कन्हैया तो प्रेम का भूखा है,

जो प्रेम है ये उसका है,

दुनिया की दौलत से कान्हा खुश नहीं होते,

वरना ये पैसे वाले इसको खरीद ही लेते,

इसे अपने घर ले जाके जो चाहते सो करवाते,

कन्हैया तो प्रेम का भूखा है,

जो प्रेम है ये उसका है,

नरसी करमा मीरा ने दौलत नहीं दिखाई,

इसी लिये तो उनको देते श्याम दिखाई,

सूखे टंगुल भी चबाये प्रभु साग विधुर घर आये ,

कन्हैया तो प्रेम का भूखा है,

जो प्रेम है ये उसका है,

झूठा प्रेम किया तो चौक श्याम को लगती,

रूठ गये अगर बाबा बिक जाये ये हस्ती,

संजू करले तू भक्ति लुटे गा हर पल मस्ती,

कन्हैया तो प्रेम का भूखा है,

जो प्रेम है ये उसका है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।