आज लगा झुँझन वाली को मेरी याद भी आती है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लेता हु जब नाम तेरा हिचकिया मेरी रुक जाती है,

आज लगा झुँझन वाली को मेरी याद भी आती है,

माँ का दिल बस इतना चाहे बेटा उसके पास रहे,

सुख दुःख की बतलाये माँ से प्यार की दो ही बात कहे,

करके इशारा मियां मुझको अपने पास भुलाती है,

आज लगा झुँझन वाली को मेरी याद भी आती है,

होके दूर मेरी मैया से दूर कहा मैं रहता हु,

दिन हो चाहे रात सदा मैं दादी नाम ही लेता हु,

वो मेरे सपनो में आते सिर पे हाथ फिराती है,

आज लगा झुँझन वाली को मेरी याद भी आती है,

तूने पाला तूने सम्बाळा ये जीवन अब तेरा है,

बोले सचिन दादी चरणों में स्वर्ग वसा ये मेरा है,

वो अपनी सेवा में मुझपे यु ही प्यार लुटाती है,

आज लगा झुँझन वाली को मेरी याद भी आती है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।