ये मेरी मुरली सुनकर तुम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रियतमा कहूँ, श्यामा कहूँ, या श्रीराधा कहूँ,

कुछ समझ पाऊँ नहीं, अब आपको मैं क्या कहूँ,

ये मेरी मुरली सुनकर तुम, कि यमुना कूल आ जाना,

कि तुम मेरी प्रिया हो, कि तुम मेरी प्रिया हो,

ये मेरी मुरली सुनकर तुम, कि यमुना कूल आ जाना,

कि तुम मेरी प्रिया हो, कि तुम मेरी प्रिया हो,

तुम्हें सब जानते राधे, हो जीवन-संगिनी मेरी,

तुम्हें सब जानते राधे, हो जीवन-संगिनी मेरी,

सनातन से कमलनयनी, हो तुम अर्धांगिनी मेरी

आ बैठें तीर कालिन्दी, कदम की छाँव घनेरीं,

छाँव घनेरीं, छाँव घनेरीं,

ये मेरी मुरली सुनकर तुम, कि यमुना कूल आ जाना,

कि तुम मेरी प्रिया हो, कि तुम मेरी प्रिया हो,

हो श्यामा रूप तुम मेरा, तुम्हारा रूप हूँ मैं,

हो श्यामा रूप तुम मेरा, तुम्हारा रूप हूँ मैं,

बसीं हो तुम हृदय मेरे, तुम्हारे दिल में हूँ मैं,

कृष्ण के नाम से आगे, तुम्हारा नाम होगा,

नाम होगा, नाम होगा,

ये मेरी मुरली सुनकर तुम, कि यमुना कूल आ जाना,

कि तुम मेरी प्रिया हो, कि तुम मेरी प्रिया हो,

ये मेरी मुरली सुनकर तुम, कि यमुना कूल आ जाना,

कि तुम मेरी प्रिया हो, कि तुम मेरी प्रिया हो,

ऊँ ऊँ ऊँ ऊँऽऽऽऽ..... ूँ ऊँ ऊँ ऊँऽऽऽऽ.....

कि तुम मेरी प्रिया हो, कि तुम मेरी प्रिया हो,

ऊँ ऊँ ऊँ ऊँऽऽऽऽ..... ूँ ऊँ ऊँ ऊँऽऽऽऽ.....

कि तुम मेरी प्रिया हो, कि तुम मेरी प्रिया हो,

(गीत रचना- अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।