मैं तो कब से खड़ी तेरे द्वार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आ जाओ....माँ गौरी,

मैं तो आन पड़ी तेरे द्वार,

ओ माँ मेरी नैया लगा दे पार,

आ जाओ....माँ गौरी,

मैं तो आन पड़ी तेरे द्वार,

ओ माँ मेरी नैया लगा दो पार,

आ जाओ....माँ गौरी,

भवसागर मझधार में नैया,

कोई नहीं है इसका खिबैया,

भवसागर मझधार में नैया,

कोई नहीं है इसका खिबैया,

लाज रखो अब मेरी मैया, ओ....

आ जाओ, मैं तो आन पड़ी तेरे द्वार,

ओ माँ मेरी नैया लगा दो पार,

आ जाओ....माँ गौरी,

देख रही मैं अंखियाँ खोले,

जीवन नैया डगमग डोले,

देख रही मैं अंखियाँ खोले,

जीवन नैया डगमग डोले,

बीच भंवर में ले हिचकोले, ओ....

आ जाओ, मैं तो आन पड़ी तेरे द्वार,

ओ माँ मेरी नैया लगा दो पार,

आ जाओ....माँ गौरी,

पल-पल याद तिहारी आये,

चैन नहीं मन मेरा पाये,

पल-पल याद तिहारी आये,

चैन नहीं मन मेरा पाये,

तेरे बिन अब कुछ न भाये, ओ....आ जाओ,

मैं तो आन पड़ी तेरे द्वार,

ओ माँ मेरी नैया लगा दे पार,

आ जाओ....माँ गौरी,

(गीत रचना- अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।