सरवन जैसा नही रे सेवक

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

चार वेध के शास्त्र देख लो ॐ सरेखा नाम नही

सरवन जैसा नही रे सेवक कौसल्या शी माता नहीं

सीता जैसी नहीं सती वो ,लक्समन जैसा जती नही ओ जती नही...

पिता वचन पालन करने में राम सरेखा पुत्र नही...

सरवन जैसा नही रे सेवक कौसल्या शी माता नहीं

बजरग जैसी नही भुजा वो ,अंगद जैसा पाँव नही ओ पाँव नही

तीन त्रैलोकी की अंदर देखो ,भरत सरीखा भाई नही...

सरवन जैसा नही रे सेवक कौसल्या शी माता नहीं

भीषम सरीखी नही प्रतिज्ञा ,करण जैसा दानी नहीं ओ दानी नहीं

तीन त्रैलोकी की अंदर देखो, रावण सरीखा अभिमानी नहीं....

सरवन जैसा नही रे सेवक कौसल्या शी माता नहीं

परसुराम सा परसधारी ,कुम्भकरण शी नींद नहीं ओ नींद नहीं

तीन त्रैलोकी की अंदर देखो नारद सरीखा ज्ञानी नहीं.....

सरवन जैसा नही रे सेवक कौसल्या शी माता नहीं

गाँधी जैसा नही रे महात्मा ,नेहरू जैसा ध्यानी नहीं ओ ध्यानी नहीं...

कहे भक्त सुन भाई साधु,दया सरीखा दान नहीं

सरवन जैसा नही रे सेवक कौसल्या शी माता नहीं

दशरथ पाटीदार

पाटीदार डिजिटल स्टूडियो दारू

मो.9669046049

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।