जटाधारी बनके त्रिपुरारी बनके चले आना

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जटाधारी बनके त्रिपुरारी बनके चले आना,

भोले चले आना, चले आना...

तुम ओघड रूप में आना,

भूत साथ लेके

मुंड हाथ लेके चले आना....

जटाधारी बनके......

तुम भंगिया रूप में आना

जोला हाथ लेके

भंग साथ लेके चले आना....

जटाधारी बनके......

तुम जोगिया रूप में आना

डमरू हाथ लेके

नंदी साथ लेके चले आना...

जटाधारी बनके.....

तुम मोहिनी रूप में आना

गंगा साथ लेके

चंदा माथ लेके चले आना...

जटाधारी बनके.....

तुम भोले रूप में आना

गोरा साथ लेके

त्रिशूल हाथ लेके, चले आना....

जटाधारी बनके....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।