मेरे भोले की मूरत सजी है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे भोले की मूरत सजी है

शिव रात्रि की धूम मची है

शिवरात्रि पर्व महान है शिव पूजा की धूम महान है,

शिव आसमा गोरी ज़मीन है,

मेरे भोले की मूरत सजी है

शिव रात्रि की धूम मची है

दिल की भांति मन को धुप दिखा कर,

श्रद्धा की प्रतिभा का भंग चढ़ा कर,

शिव शक्ति में होक रमी है,

शिव रात्रि की धूम मची है

दूध और जल की धरा बही है,

भक्ति का सुख सारा यही है,

सारी श्रिष्टि में ज्योत जगी है,

शिव रात्रि की धूम मची है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।