शहनाइयां भजाओ जी शिव रात आ गई

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शहनाइयां भजाओ जी शिव रात आ गई,

शिव रात आ गई आ गई शिव रात आ गई,

गोरा के द्वार भोले की बारात आ गई,

बारात आ गई भोले की बारात आ गई,

शहनाइयां भजाओ जी शिव रात आ गई,

जिस ने बारात देखि हैरान हो गया,

देवो के पिशे भूतो की जमात आ गई,

शहनाइयां भजाओ जी शिव रात आ गई,

सर्पो का सेहरा बाँध के नंदी पे बैठ के,

गिरजा के भाग में लिखी सौगात आ गई,

शहनाइयां भजाओ जी शिव रात आ गई,

कोई भंग की तरंग में कोई सूफी संत है,

लगता है शिव के साथ कायनात आ गई,

शहनाइयां भजाओ जी शिव रात आ गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।