मिले हो मुझे प्रभु बड़े नसीबो से

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॥ पावन पाठ ॥

पार्श्वनाथ प्रभु मेरे पार्श्वनाथ प्रभु

पार्श्वनाथ प्रभु मेरे पार्श्वनाथ प्रभु

मिले हो मुझे प्रभु, बड़े नसीबो से

है पाया मैंने तुझे, पिछले शुभ कर्मों से

तेरी ही भक्ति से मन ये खिला है

सदा रखना तू चरणों मे मुझे

मिले हो मुझे प्रभु, बड़े नसीबो से

है पाया मैंने तुझे, पिछले शुभ कर्मों से

तेरी बात बाबा जरा हटके है

तुझे पाने लख चौरासी भटके है

जिंदगी में मेरी बाबा जो भी कमी थी

तेरे दर पे आ जाने से नही रही

मिले हो मुझे प्रभु, बड़े नसीबो से

है पाया मैंने तुझे, पिछले शुभ कर्मों से

चरणों मे तेरी तो बाबा जन्नत है

तेरी पूजा भक्ति करना अमृत है

तेरी शरण में प्रभुजी जब से में आया

बिन मांगे ही मैंने सब पाया...

मिले हो मुझे प्रभु, बड़े नसीबो से

है पाया मैंने तुझे, पिछले शुभ कर्मों से

तेरी ही भक्ति से मन ये खिला है

सदा रखना तू चरणों मे मुझे

मिले हो मुझे प्रभु, बड़े नसीबो से

है पाया मैंने तुझे, पिछले शुभ कर्मों से

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।