मेरे गुरुवर जहाँ आ जाये

पारंपरिक
महादेव भजन जैन भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे गुरुवर जहाँ आ जाये

वहाँ लग जाता भक्तों का तांता

मेरे गुरुवर जहाँ आ जाये

वहा खुशियों का मौसम है आता

गुरु दर्शन की आस मन लेके

गुरु दर्शन को जो भी है आता

मेरे गुरुवर है जब मुस्कुराते

मन में आनंद आनंद छाता

मेरे गुरुवर है जग से निराले

आत्म कल्याण करना सिखाये

वो तो भटके हुए आत्मनो को

शिव पथ का है राही बनाये

विद्यासागर है पुष्प ऐसे

ज्ञान अमृत सदा बरसाये

वो तो सूरज के जैसे चमकते

भक्त मोहित हो जग भुल जाये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।